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S.No | Particular | Page No. | |
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1 |
Dr Suddhasattwa BanerjeeAbstract: Weekly Village markets have been at the centre of village life of the Radh region of Bengal through ages. These markets have been the places of confluence of different types of people of village society. |
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1-14 |
2 |
Dr. C. N Baby MaheswariAbstract: The paper aims to explore the wide gamut of human emotions in the novels of Manju Kapur with special focus on man-woman relationship. |
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15-26 |
3 |
Mo ReddadAbstract: The socio-economic reality in Taiwan, to a large extent, does not lend itself to an effective communicative language teaching within an EFL (Teaching English as Foreign Language) setting. |
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27-40 |
4 |
Sangeetha. JAbstract: In the present scenario the ideas of nation, identity and entitlement are undergoing far reaching reconfiguration. |
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41-47 |
5 |
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48-50 |
6 |
Khum Prasad SharmaAbstract: Modern life is a manifestation of ecological crisis of different kinds. These adverse conditions are the consequences of the destruction of nature from fertility to aridity. This is a global problem. Human’s greed to conquer nature has resulted in a deplorable state of humanity. In such a critical situation, when the world is facing depletion, a thorough eco-consciousness is necessary for its survival. Human beings with their unique literary talent bear the great responsibility to influence human behavior so as to enable them to maintain a healthy relationship with their natural environment. Eco-feminism, which is an amalgamation of ecology and feminism, is a concept which questions the patriarchal oppression and the exploitation of nature. |
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61-68 |
7 |
Mrs. Eze EdithAbstract: This study was designed to examine the significance of the individual and collective contributions to students’ learning of oral English via the Digital Language Laboratory. Based on this, one research question and one hypothesis were formulated to guide the study. The study is quasi experimental design which involved the use of intact classes. All seventy-seven year one students of the Department of Language Studies, Enugu State College of Education (Technical) ESCET, Enugu and sixty students of the Department of Language Studies, Institute of Ecumenical Education Thinkers Corner, Enugu were used for the study |
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51-60 |
8 |
Md Masihur RahmanAbstract: The Patna scandal offers Marlow, the primary narrator in Lord Jim, an occasion to develop his close rapport with Jim, the first mate of the ship. This affair which involves the abandonment of 800 Muslim/Malays pilgrims on the ship by Jim, a white European crew, is a prime concern which was being thoroughly investigated. The episode reflects a suppressed tension between white and non-white in a world which is already divided. |
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71-76 |
9 |
Sayar Ahmad Mir,Abstract: This paper attempts to explore cross-cultural transactions in Amitav Ghosh’s The Shadow Lines. An exploration of cross-cultural connections is presented involving the narrator's family in Delhi and the Price family in London |
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77-83 |
10 |
डाॅ. श्रीमती प्रकाश अमरावतAbstract: जिण मारग बारहठ बुआ, बहता सह देसोत। माळा माथै मुलक रै, जगती जस री जोत।। मरस्यां पण हरस्यां नहीं, बारहठ रा में बोल। (सवाईसिंह धमोरा) बारहठ केसरीसिंह का जन्म संवत् 21 नवम्बर 1972 को शाहपुरा के समीप अपनी पैतृक जागीर के गांव ‘देवपुरा’ में हुआ। आपके पिता कृष्णसिंह सौदा बारहठ एक कुशल राजनीतिज्ञ और राजस्थान के प्रमुख नरेशों के परामर्शदाता के रूप में ख्याति प्राप्त थे। आप (कृष्णसिंह बारहठ) के तीनों पुत्रों में केसरीसिंह बारहठ, किशोरसिंह बारहठ जो ‘ब्रार्हस्पत्य’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। तत्कालीन पटियाला रियासत के स्टेट हिस्टोरियन थे। तीसरे पुत्र क्रांतिकारी जोरावरसिंह बारहठ थे। बारहठ परिवार दो देशप्रेम, स्वाभिमान, शौर्य और विद्वता विरासत में मिली थी। केसरीसिंह बारहठ अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे। संस्कृत साहित्य और राजनीति का प्रकांड पंडित होने के उच्च कोटि के साथ डिंगल के महान कवि थे। मराठी, गुजराती और बंगला के उच्च कोटि के विद्वान थे। कवि केसरीसिंह बारहठ अपनी पिता कृष्णसिंहजी के जोधपुर महाराजा की सेवा में चले जाने के पश्चात् उदयपुर महाराणा उन्हें कोटा नरेश की सेवा में नियुक्ति दे दी गई और आपको कोटा आना पड़ा। केसरीसिंह का बंगाल और महाराष्ट्र के क्रांतिकारियों से घनिष्ठ संबंध थे। राजस्थान में क्रांतिकारी संगठन के वे मुख्य स्तम्भ थे। |
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84-89 |
11 |
डाॅ. आराधना सारवानAbstract: 21वीं सदी समस्त विश्व के लिए अनेक अर्थों में एक नई सदी की तरह अवतरित हुई। अर्थ, राजनीति, बाजार, संचार, शिक्षा, नई तकनीक, विज्ञान सभी क्षे़त्रों ने सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित किया और सारा संसार एक विश्व गाँव की परिभाषा में सिमटने को तैयार दिखाई पड़ा। ऐसे में निश्चित रूप से अन्य क्षेत्रों की भाँति भारतीय समाज में स्त्री ने भी अपने उत्थान, विकास और आज़ादी के सपने देखने शुरू किये। उस स्त्री ने जो भारतीय संस्कृति और धर्म में देवी ओैर सती की उपमा तो पाती रही है, लेकिन उसकी स्थिति सदियों से घूँटे से बँधी गाय के अतिरिक्त और कुछ नहीं रही। बल्कि यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि कुछ अपवादों को छोड़ कर उसकी स्थिति आज भी जानवरों से भी बदत्तर है। न केवल उसके मानवीय अधिकारों का हनन होता रहा है। बल्कि उसका शारीरिक और मानसिक शोषण आज भी भारतीय समाज की मानसिकता बना हुआ है। जिसके मूल में भारतीय समाज की पितृसत्तात्मक संरचना है, जिसने स्त्री को हमेशा दोयम दर्जे पर रखा है। वो स्त्री जो ना केवल भारतीय आबादी का आधा हिस्सा है बल्कि भारतीय सामाजिक संस्थागात ढाँचे की रीड़ है। उस पर बोझ तो सारे डाले गए हंै, बस अधिकारों से वंचित रखा गया । और अपनी स्थिति के लिए स्त्रियाॅँ भी कुछ सीमा तक या बहुत कुछ जिम्मेदार रही है। जिसका सीधा -सीधा कारण उसकी अशिक्षा, आत्मनिर्भरता का अभाव भी रहा है । जहाँ तकनीकि, विज्ञान और आर्थिक व्यापार जगत में भारत विश्व में अनेक क्षेत्रों में अपना लोहा मनवा रहा है। अनेक शोध यह साबित कर चुके है कि स्त्रियों की स्थिति में भारत विश्व में बार-बार निचले पायदान पर अपनी जगह बनाता है। |
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90-95 |