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1
  • भारत में मतदान व्यवहार-: एक विश्लेषण


Dr. Reena

Abstract: किसी भी लोकतंत्रिय शासन प्रणाली की सफलता एवं कार्यान्वयन इस बात पर निर्भर करता है कि उस क्षेत्र में रहने वाले मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार मतदान का प्रयोग करते समय किन-किन सकारात्मक तथ्यों को ध्यान में रखते हैं तथा अपने अधिकारों के प्रति कितने सचेत हैं। भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी की जंजीरें उतारकर स्वतंत्रता प्राप्त की तत्पश्चात 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ जिससे भारत में संपूर्ण प्रभुसत्ता संपन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव रखी गई


8-13
2
  • प्रेमचंद जी के उपन्यासों में समाज दर्शन


डॉ पंकज कुमार

Abstract: हिन्दी में आधुनिक काल का आगमन 1900 के दशक से माना जाता है। प्रारम्भ में आधुनिक हिन्दी साहित्य जादुई और परियों की कहानियों पर केन्द्रित था, जो कल्पना से पाठकों का मनोरंजन करता था। धनपत राय श्रीवास्तव के रूप में जन्मे, उन्होंने नवाब राय नाम से एक स्वतंत्र लेखक के रूप में अपना करियर शुरू किया लेकिन जब उनका काम सोज-ए वतन, लघु कथाओं का एक संग्रह ब्रिटिश सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया और जला दिया गया, इसके बाद उन्होंने मुंशी प्रेमचंद नाम से हिंदी में लिखना शुरू किया। प्रेमचंद को आमतौर पर भारत के टॉल्स्टॉय के रूप में जाना जाता है, जिसने हिंदी साहित्य को एक वास्तविकता में आकार दिया। उन्होंने एक उपन्यासकार, कहानीकार और एक नाटककार के रूप में साहित्यिक शैली पर विजय प्राप्त की और हिंदी आधुनिक साहित्य में उपन्यास सम्राट (उपन्यासों के सम्राट) के रूप में शीर्षक दिया गया। उन्होंने पाठकों के सामने समाज की वास्तविकता का चित्रण कर हिंदी साहित्य जगत को एक नया आयाम दिया। उन्होंने अपने उपन्यास सेवासदन से वर्ष 1917 में हिंदी साहित्य जगत में प्रवेश किया।


14-21
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